:
Breaking News

Bihar Smart Meter: देश के 70% प्रीपेड स्मार्ट मीटर बिहार में, 92 लाख मीटर से बदली बिजली व्यवस्था

top-news
https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Bihar Smart Meter | बिहार में 92 लाख प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। स्मार्ट मीटरिंग से बिलिंग दक्षता बढ़ी और AT&C हानियां 35.12% से घटकर 11.54% हुईं।

पटना, 8 अगस्त। बिहार की बिजली वितरण व्यवस्था पिछले कुछ वर्षों में तेजी से डिजिटल होती दिखाई दे रही है। स्मार्ट मीटरिंग के क्षेत्र में राज्य ने ऐसा विस्तार किया है कि देशभर में लगाए गए प्रीपेड स्मार्ट मीटरों में बिहार की हिस्सेदारी करीब 70 प्रतिशत तक पहुंच गई है। राज्य में अब तक लगभग 92 लाख प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। प्रीपेड और पोस्टपेड दोनों तरह के स्मार्ट मीटरों को मिलाकर देखें तो देश में स्थापित कुल स्मार्ट मीटरों में बिहार की हिस्सेदारी करीब 30 प्रतिशत बताई जा रही है।

बिजली वितरण में तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर यह जानकारी नई दिल्ली में आयोजित 7वें CII International Energy Conference and Exhibition (IECE 2026) के दौरान सामने आई। सम्मेलन में बिहार के ऊर्जा सचिव और BSPHCL के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक अजय यादव ने राज्य में बिजली वितरण के क्षेत्र में हुए बदलावों और डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल की जानकारी साझा की।

स्मार्ट मीटर को बिहार की बिजली व्यवस्था में हुए बदलाव का एक प्रमुख आधार माना जा रहा है। इसके जरिए उपभोक्ताओं की बिजली खपत का डेटा डिजिटल रूप में उपलब्ध हो रहा है। इससे बिजली कंपनियों को खपत का पैटर्न समझने, मांग का अनुमान लगाने और आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर तरीके से संचालित करने में मदद मिल रही है।

पांच साल में बिलिंग व्यवस्था में बड़ा सुधार

बिहार में स्मार्ट मीटरिंग के साथ बिजली वितरण कंपनियों की कार्यक्षमता में भी सुधार दर्ज किया गया है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2020 में राज्य की बिलिंग दक्षता 75.14 प्रतिशत थी, जो 2025 तक बढ़कर 88.46 प्रतिशत हो गई।

इसी अवधि में संग्रहण दक्षता में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई। बिजली बिल की वसूली से जुड़ी दक्षता करीब 86 प्रतिशत से बढ़कर 100 प्रतिशत तक पहुंचने का दावा किया गया है। इसका सीधा असर बिजली वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति पर पड़ा है।

बिजली वितरण के दौरान होने वाली तकनीकी और वाणिज्यिक हानियों को भी कम करने में सफलता मिलने की बात कही गई है। वर्ष 2020 में AT&C हानियां 35.12 प्रतिशत थीं, जो 2025 में घटकर 11.54 प्रतिशत रह गईं। बिजली चोरी में कमी और बकाया राशि पर नियंत्रण को इस सुधार की प्रमुख वजहों में शामिल किया जा रहा है।

10 अरब डेटा पॉइंट्स से बिजली की खपत पर नजर

स्मार्ट मीटर लगाने के बाद बिहार के पास बिजली उपभोग से जुड़ा विशाल डिजिटल डेटा उपलब्ध हुआ है। राज्य में लगाए गए स्मार्ट मीटरों से करीब 10 अरब डेटा पॉइंट्स जुटाए जाने की जानकारी दी गई है।

इतने बड़े डेटा का इस्तेमाल केवल बिल तैयार करने तक सीमित नहीं है। बिजली कंपनियां खपत के रुझान को समझने, भविष्य की मांग का अनुमान लगाने और जरूरत के हिसाब से आपूर्ति व्यवस्था तैयार करने के लिए इसका इस्तेमाल कर सकती हैं।

इससे बिजली वितरण व्यवस्था को पहले की तुलना में ज्यादा डेटा आधारित बनाने में मदद मिल रही है। आने वाले समय में इसी तरह के डेटा का इस्तेमाल कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI आधारित विश्लेषण और मांग प्रबंधन में भी बढ़ाया जा सकता है।

ट्रांसफॉर्मरों की भी रियल टाइम निगरानी

बिहार में केवल उपभोक्ताओं के मीटरों पर ही तकनीकी बदलाव नहीं किया गया है। राज्य में करीब 2 लाख डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफॉर्मरों पर भी मीटर लगाए जा चुके हैं।

इस व्यवस्था से बिजली वितरण नेटवर्क में लगे ट्रांसफॉर्मरों की स्थिति पर अधिक प्रभावी नजर रखी जा सकती है। किसी क्षेत्र में लोड बढ़ने या आपूर्ति से संबंधित समस्या आने पर उसके कारणों की पहचान करने में डिजिटल निगरानी मददगार हो सकती है।

इससे बिजली वितरण कंपनियों के लिए खराबी का पता लगाने और आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर बनाने की प्रक्रिया भी पहले की तुलना में अधिक व्यवस्थित होने की उम्मीद है।

ToD टैरिफ और डिजिटल सेवाओं पर भी जोर

बिहार ने बिजली के इस्तेमाल को समय के हिसाब से प्रबंधित करने के लिए Time-of-Day यानी ToD टैरिफ व्यवस्था को भी लागू किया है। इसका उद्देश्य अलग-अलग समय पर बिजली की मांग और खपत को बेहतर तरीके से प्रबंधित करना है।

इसके अलावा बिजली वितरण व्यवस्था में IoT आधारित निगरानी, GIS आधारित परिसंपत्ति मैपिंग, डिजिटल एसेट रजिस्टर और CRM प्लेटफॉर्म जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

उपभोक्ताओं को ऑनलाइन सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए ‘सुविधा बिहार पोर्टल’ भी संचालित किया जा रहा है। इसके जरिए बिजली उपभोक्ताओं को 21 तरह की ऑनलाइन सेवाएं उपलब्ध होने की जानकारी दी गई है।

पीक डिमांड 9,475 मेगावाट तक पहुंची

बिहार में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। इस वर्ष राज्य ने 9,475 मेगावाट की रिकॉर्ड पीक डिमांड पूरी की। बढ़ती मांग के बावजूद शहरी क्षेत्रों में 23 से 24 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में 22 से 23 घंटे तक बिजली आपूर्ति का दावा किया गया है।

इससे यह संकेत मिलता है कि राज्य में बिजली की उपलब्धता बढ़ने के साथ वितरण नेटवर्क की क्षमता पर भी लगातार काम किया जा रहा है। सरकार के सामने अब चुनौती केवल ज्यादा बिजली उपलब्ध कराने की नहीं, बल्कि उसे स्थिर और गुणवत्तापूर्ण तरीके से उपभोक्ताओं तक पहुंचाने की है।

सौर ऊर्जा और स्मार्ट ग्रिड पर अगला फोकस

बिहार की ऊर्जा योजना अब पारंपरिक बिजली आपूर्ति से आगे बढ़कर नवीकरणीय ऊर्जा पर भी केंद्रित हो रही है। राज्य में 13 ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप के साथ रूफटॉप सोलर, कृषि फीडरों के सोलराइजेशन और पीएम-कुसुम योजना के विस्तार पर काम किया जा रहा है।

नवीकरणीय ऊर्जा का उत्पादन बढ़ने के साथ बिजली वितरण नेटवर्क के सामने नई चुनौतियां भी आएंगी। ऐसे में स्मार्ट ग्रिड, IoT और डेटा एनालिटिक्स जैसी तकनीकों का इस्तेमाल महत्वपूर्ण हो सकता है।

स्मार्ट मीटर इसी बदलाव की आधारभूत कड़ी बन रहे हैं। इनसे उपभोक्ता स्तर पर खपत का डेटा मिलने के साथ वितरण कंपनियों को पूरे नेटवर्क की निगरानी में भी मदद मिलती है।

बिहार की बिजली व्यवस्था में डिजिटल बदलाव का बड़ा संकेत

बिहार में 92 लाख प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाए जाना केवल मीटर बदलने की प्रक्रिया नहीं है। इसका असर बिजली बिलिंग, वसूली, चोरी पर नियंत्रण, उपभोक्ता सेवाओं और वितरण व्यवस्था की निगरानी तक दिखाई दे रहा है।

2020 से 2025 के बीच बिलिंग दक्षता में सुधार और AT&C हानियों में बड़ी कमी इस बदलाव के महत्वपूर्ण संकेत माने जा सकते हैं। हालांकि स्मार्ट मीटरिंग के साथ उपभोक्ताओं के लिए पारदर्शिता, सही बिलिंग और शिकायतों के त्वरित समाधान को भी लगातार मजबूत करना जरूरी होगा।

आने वाले वर्षों में बिजली की मांग बढ़ने के साथ बिहार को अपने वितरण नेटवर्क को और आधुनिक बनाना होगा। AI आधारित विश्लेषण, स्मार्ट ग्रिड, IoT निगरानी और डिजिटल उपभोक्ता सेवाएं इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

बिहार में स्मार्ट मीटरों का इतना बड़ा नेटवर्क तैयार होना इस बात का संकेत है कि राज्य की बिजली व्यवस्था अब केवल उत्पादन और आपूर्ति तक सीमित नहीं रह गई है। डेटा और डिजिटल तकनीक के सहारे वितरण व्यवस्था को अधिक कुशल बनाने की दिशा में भी बड़ा बदलाव हो रहा है।

डिजिटल बिजली व्यवस्था से बिहार को क्या फायदा?

स्मार्ट मीटरिंग का सबसे बड़ा फायदा बिजली खपत की सटीक जानकारी और बिलिंग व्यवस्था को डिजिटल बनाना है। इससे बिजली कंपनियों को वास्तविक खपत का डेटा मिलता है और उपभोक्ताओं को भी अपनी बिजली खपत पर नजर रखने का अवसर मिलता है।

दूसरी ओर, वितरण कंपनियों के लिए चोरी और लाइन लॉस की पहचान करना आसान हो सकता है। ट्रांसफॉर्मर और अन्य नेटवर्क परिसंपत्तियों की डिजिटल निगरानी से खराबी का पता लगाने और मरम्मत की प्रक्रिया को भी तेज किया जा सकता है।

बिहार में 92 लाख प्रीपेड स्मार्ट मीटर का आंकड़ा इस डिजिटल बदलाव की व्यापकता बताता है। अब असली चुनौती इस तकनीक से मिलने वाले डेटा का बेहतर इस्तेमाल कर बिजली की गुणवत्ता, उपभोक्ता सुविधा और आपूर्ति की विश्वसनीयता को और मजबूत करने की होगी।

यह भी पढ़ें

बिहार में बिजली व्यवस्था, स्मार्ट मीटर और नई ऊर्जा योजनाओं से जुड़ी ताजा खबरें Alam Ki Khabar पर पढ़ें।

https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *